रविवार, 31 मई 2020

कबीर साहेब की लीलाएं

कबीर साहेब जी ने अनेकों लीलाएं कि जिनको हम कम ही जानते हैं। आइए उनकी लीलाओं पर कुछ प्रकाश डालते हैं:-

1.परमात्मा को मारने कि कुचेष्टा

कबीर साहेब सिकंदर लोधी के दरबार में बैठकर सत्संग कर रहे थे तब शेखतकी ने सिपाही से कहा कि लोहे को गर्म करके पिघलाकर पानी की तरह बनाओ और कबीर साहेब पर डालो।

 ठीक ऐसा ही हुआ जब लोहा गर्म करके पिघलाकर कबीर साहेब पर डाला तब वह फूल बन गए जैसे की मानो फूलों की वर्षा होने लगी। तब सभी ने कबीर साहेब की जय जयकार लगाई।

2. गंगा दरिया में डुबोकर मारने की कुचेष्टा

दिल्ली के सम्राट सिकंदर लोधी ने जनता को शांत करने के लिए अपने हाथों से हथकड़ियाँ लगाई,पैरों में बेड़ी तथा गले में लोहे की भारी बेल डाली आदेश दिया गंगा दरिया में डुबोकर मारने का। उनको दरिया में फेंक दिया।

कबीर परमेश्वर जी की हथकड़ी, बेड़ी और लोहे की बेल अपने आप टुट गयी। परमात्मा जल पर सुखासन में बैठे रहे कुछ नहीं बिगड़।

3.खूनी हाथी से मरवाने की व्यर्थ चेष्टा

शेखतकी के कहने पर दिल्ली के बादशाह सिकंदर लोधी ने कबीर परमेश्वर को खूनी हाथी से मरवाने की आज्ञा दे दी। शेखतकी ने महावत से कहकर हाथी को एक-दो शीशी शराब की पिलाने को कहा। हाथी मस्ती में भरकर कबीर परमेश्वर को मारने चला। कबीर जी के हाथ-पैर बाँधकर पृथ्वी पर डाल रखा था।

जब हाथी परमेश्वर कबीर जी से दस कदम (५० फुट) दूर रह गया तो परमेश्वर कबीर के पास बब्बर शेर खड़ा केवल हाथी को दिखाई दिया। हाथी डर से चिल्लाकर (चिंघाड़ मारकर) भागने लगा।परमेश्वर के सब रस्से टूट गए। उनका तेजोमय विराट रूप सिकंदर लोधी को दिखा। तब बादशाह ने कापते हुए अपने गुनाह की माफी मांगी।

4.मुर्दे को जीवित करने की परीक्षा लेना

दिल्ली के बादशाह सिकन्दर लोधी के पीर शेख तकी ने कहा कबीर जी को तब अल्लाह मानेंगे जब मेरी मरी हुई लड़की को जीवित कर देगा जो कब्र में दबी हुई है।

कबीर परमेश्वर जी ने अपनी समर्थ शक्ति से हजारों लोगों के सामने उस लड़की को जीवित किया और उसका नाम कमाली रखा। कबीर परमेश्वर सर्वशक्तिमान हैं।

5.कबीर साहेब को नीचा दिखाने की कुचेष्टा

शेखतकी पीर ने कबीर साहेब को नीचा दिखाने के लिए ३ दिन के भंडारे की कबीर साहेब के नाम से सभी सभी आश्रमों में झूठी चिठ्ठी डलवाई थी कि कबीर जी ३ दिन का भंडारा करेंगे सभी आना भोजन के बाद एक मोहर, एक दोहर भी देंगे|

 कबीर साहेब ने ३ दिन का मोहन भंडारा भी करा दिया था और कबीर साहेब की महिमा भी हुई।

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