परमात्मा कौन है कैसा है काह रहता है किस आकार में है?
ये प्रश्न एक जटिल प्रश्न के रुप में उभर कर सामने आ रहा है। हमारे देश में अनेक धर्म है अनेक महापुरुष हैं। ओर बहुत से विद्वान हैं जो शास्त्रों को काफी हद तक जानकारी रखते हैं।
मान्यता
जिन महापुरुषों ने शास्त्रों को पढ़ा और अपने-अपने हिसाब से परमात्मा की जानकारी दी।
कुछ महापुरुषों ने परमात्मा को निराकार (जिनका कोई आकार नहीं) बताया वहीं कुछ ने परमात्मा को प्रकाश रुप में विद्यमान है बताया है जिस प्रकार पानी कि बुंद समुद्र में जाकर मिल जाती है वैसे ही आत्माएं प्रकाश रुपी परमात्मा में जाकर मिल जाती है। ओर भी अनेक महापुरुषों ने अपनी खोज के हिसाब से परमात्मा की स्थति दृशाई है।
धर्मगुरुओं की मान्यता
चारों धर्मों में परमात्मा को अलग अलग रुप में बताया है। ईसाई धर्म में परमात्मा को बेसुन ( कोई आकार नहीं ) बताया है। वहीं मुस्लिम धर्म के काजी, मौलवी परमात्मा एक ही हैं बताते हैं ओर अल्लाह के नाम से जानते हैं। वहीं सिखं धर्म के धर्मगुरु नानक जी को मानते हैं और हमारे पवित्र हिन्दू धर्म के धर्मगुरु परमात्मा को निराकार मानते हैं और अन्य अनेक देवी-देवताओं को मानते हैं।
परमात्मा की वास्तविक पहचान
हमारे पवित्र शास्त्रों में अनेकों जगह प्रमाण है कि परमात्मा साकार है।
परमात्मा ने 6 दिन में सृष्टि की रचना की तथा सातवें दिन अपने सिंहासन पर जाकर बैठ गए परमात्मा ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप में बनाया है इससे यह सिद्ध होता है कि परमात्मा का मनुष्य जैसा ही शरीर हैं मतलब परमात्मा सशरीर है वह देखने योग्य हैं।
तत्वज्ञान को बताना
आज हमारे पवित्र शास्त्रों के इस गूढ़ रहस्य को संत रामपाल जी महाराज ने सबके सामने दर्शाया है
और बताया है कि परमात्मा साकार है शरीर है जिसका नाम कबीर है यह कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं बल्कि हमारे पवित्र शास्त्रों से प्रमाणित है अधिक जानकारी के लिए देखें पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञानगंगा वह जीने की राह।
ये प्रश्न एक जटिल प्रश्न के रुप में उभर कर सामने आ रहा है। हमारे देश में अनेक धर्म है अनेक महापुरुष हैं। ओर बहुत से विद्वान हैं जो शास्त्रों को काफी हद तक जानकारी रखते हैं।
मान्यता
जिन महापुरुषों ने शास्त्रों को पढ़ा और अपने-अपने हिसाब से परमात्मा की जानकारी दी।
कुछ महापुरुषों ने परमात्मा को निराकार (जिनका कोई आकार नहीं) बताया वहीं कुछ ने परमात्मा को प्रकाश रुप में विद्यमान है बताया है जिस प्रकार पानी कि बुंद समुद्र में जाकर मिल जाती है वैसे ही आत्माएं प्रकाश रुपी परमात्मा में जाकर मिल जाती है। ओर भी अनेक महापुरुषों ने अपनी खोज के हिसाब से परमात्मा की स्थति दृशाई है।
धर्मगुरुओं की मान्यता
चारों धर्मों में परमात्मा को अलग अलग रुप में बताया है। ईसाई धर्म में परमात्मा को बेसुन ( कोई आकार नहीं ) बताया है। वहीं मुस्लिम धर्म के काजी, मौलवी परमात्मा एक ही हैं बताते हैं ओर अल्लाह के नाम से जानते हैं। वहीं सिखं धर्म के धर्मगुरु नानक जी को मानते हैं और हमारे पवित्र हिन्दू धर्म के धर्मगुरु परमात्मा को निराकार मानते हैं और अन्य अनेक देवी-देवताओं को मानते हैं।
परमात्मा की वास्तविक पहचान
हमारे पवित्र शास्त्रों में अनेकों जगह प्रमाण है कि परमात्मा साकार है।
परमात्मा ने 6 दिन में सृष्टि की रचना की तथा सातवें दिन अपने सिंहासन पर जाकर बैठ गए परमात्मा ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप में बनाया है इससे यह सिद्ध होता है कि परमात्मा का मनुष्य जैसा ही शरीर हैं मतलब परमात्मा सशरीर है वह देखने योग्य हैं।
तत्वज्ञान को बताना
आज हमारे पवित्र शास्त्रों के इस गूढ़ रहस्य को संत रामपाल जी महाराज ने सबके सामने दर्शाया है
और बताया है कि परमात्मा साकार है शरीर है जिसका नाम कबीर है यह कोई मनगढ़ंत कहानी नहीं बल्कि हमारे पवित्र शास्त्रों से प्रमाणित है अधिक जानकारी के लिए देखें पढ़ें पवित्र पुस्तक ज्ञानगंगा वह जीने की राह।






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