शनिवार, 30 मई 2020

कबीर

कबीर शब्द आज हर एक व्यक्ति के जुबां पर है। जैसे ही कबीर शब्द किसी के दिल व दिमाग में आता है तो समाज फैल रही कुरितियां के खिलाफ एक आवाज सुनाई देती है। समाज में फैल रही पाखंड पुजा विरोध किया है हमेशा। अन्य गुरुओं संतों ने हमेशा समाज को गलत दिशा देने का काम किया है वहीं कबीर साहेब ने हमेशा समाज हित की बात कही।



जन्म
कबीर साहेब के जन्म पर लोगों के अनेक अपने विचार और मान्यताए है। कुछ का मानना है कि कबीर साहेब जन्म एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ है वहीं कुछ लोगों का मानना है कि नीरु निमा ही उनके असली मां बाप है।



कुछ महापुरुषों ने शास्त्रो को पढ़ा और बताया कि कबीर साहेब का शरीर लहरतारा तालाब में कमल के फूल पर प्राप्त हुआ था। वहीं कुछ और लोगों की मानें तो बताते हैं कि नीरु निमा के घर के आगे फुलों कि टोकरी में मिला।

मृत्यु मान्यता
अब बात आती है कबीर साहेब के मृत्यु के बारे में तो लगभग लगभग सबकी एक ही मान्यता है कि कबीर साहेब मगहर जाकर अपना शरीर त्यागा दिया था और शरीर कि जगह फूल प्राप्त हुए जिनको हिन्दू और मुसलमान दोनों ने आधे आधे बांट दिए ओर वहीं मगहर में दोनों धर्मों के लोगों ने पास पास मंदिर और दरगाह बना दी जो आज भी विद्यमान है।



सच्च से आप अनभिज्ञ हैं आप
वास्तव में सच्चाई क्या है आप लोग कम ही जानते हो।
कबीर साहेब का जन्म नहीं हुआ। कबीर साहेब सशरीर आये थे। स्वामी रामानंद जी के शिष्य स्वामी अष्टानंद के आंखों के सामने ये सब वाक्या हुआ।



कबीर साहेब पुर्ण परमात्मा है
पूर्ण परमात्मा ने पृथ्वी पर पृकट होकर कुछ पुण्यात्माओं को जिंदा महात्मा के रूप में दर्शन दिया और सतलोक लेकर गए। सतलोक में महात्मा और पूर्ण परमात्मा दो  रूप दिखा कर  स्वयं पूर्ण परमात्मा वाले सिंहासन पर विराजमान हो गए। जिन-जिन पुण्यात्माओं ने पूर्ण  परमात्मा का साक्षात दर्शन प्राप्त किया उन्होंने पृथ्वी पर वापस आने पर बताया कि कुल का मालिक पूर्ण परमात्मा एक है। वह मानव सदृश तेजोमय शरीर युक्त है। जिसके एक रोम कूप का प्रकाश करोड़ सूर्य तथा करोड़ चन्द्रमाओं की रोशनी से भी अधिक है। उसी ने नाना रूप बनाए हैं। पूर्ण परमेश्वर के वास्तविक नाम भिन्न2 भाषाओं में कविर्देव, हक्का कबीर, सत् कबीर, बन्दी छोड़ कबीर, कबीरा, कबीरन् व खबीरा या खबीरन् हैं। इसी पूर्ण परमात्मा के उपमात्मक नाम अनामी पुरुष, अगम पुरुष, अलख पुरुष, सतपुरुष, अकाल मूर्ति, शब्द स्वरूपी राम, पूर्ण ब्रह्म, परम अक्षर ब्रह्म आदि हैं।



जिन सन्तों व ऋषियों को परमात्मा प्राप्ति नहीं हुई, उन्होंने अपना अन्तिम अनुभव बताया है कि प्रभु को केवल प्रकाश रूप देखा जा सकता है, प्रभु दिखाई नहीं देता क्योंकि उसका कोई आकार नहीं है तथा शरीर में धुनि सुनना आदि प्रभु भक्ति की उपलब्धि है।


जो परमात्मा को निराकार कहते हैं तथा केवल प्रकाश देखना तथा धुनि सुनना ही प्रभु प्राप्ति मानते हैं वे पूर्ण रूप से प्रभु तथा भक्ति से अपरिचित हैं। ऐसे साधकों के न तो तत्वज्ञान रूपी नेत्र हैं तथा न ही उनके गुरुदेव के।

जिन पूर्ण सन्तों ने पूर्ण परमात्मा को देखा उन में से कुछ के नाम हैं:-
(क) आदरणीय धर्मदास साहेब जी 
(ख) आदरणीय दादू साहेब जी 
(ग) आदणीय मलूक दास साहेब जी 
(घ) आदरणीय गरीबदास साहेब जी 
(ड़) आदरणीय नानक साहेब जी 
(च) आदरणीय घीसा दास साहेब जी

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